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BPSC AEDO परीक्षा रद्द: कदाचार के बाद बड़ा फैसला, 8 FIR और 32 अभ्यर्थी प्रतिबंधित, बिहार में मचा हड़कंप

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BPSC ने AEDO और सहायक पदों की परीक्षा कदाचार के चलते रद्द कर दी है। 8 FIR दर्ज, 32 अभ्यर्थी प्रतिबंधित और जांच EOU को सौंपी गई है।

पटना/आलम की खबर: BPSC ने कदाचार के बाद AEDO परीक्षा रद्द की, 8 FIR और 32 अभ्यर्थी प्रतिबंधित

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission) ने कदाचार और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा निर्णय लिया है। आयोग के इस कदम ने न सिर्फ अभ्यर्थियों को झटका दिया है बल्कि पूरे राज्य में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी बहस छेड़ दी है।

आयोग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर ब्लूटूथ और अन्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने की कोशिश की गई थी। हालांकि प्रशासन और निगरानी टीम की सतर्कता के चलते इन प्रयासों को समय रहते विफल कर दिया गया। इसी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।

6 जिलों में फैला मामला, 8 FIR दर्ज

इस पूरे मामले में बिहार के छह जिलों में कुल 8 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। जांच एजेंसियों ने परीक्षा प्रणाली में संगठित तरीके से गड़बड़ी की आशंका जताई है। इन FIR के आधार पर कई संदिग्ध लोगों की पहचान भी की गई है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

इसके अलावा अब तक 32 अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इन सभी को भविष्य में BPSC की किसी भी परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि परीक्षा में अनुशासन और पारदर्शिता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

10 लाख से अधिक अभ्यर्थी हुए थे शामिल

यह परीक्षा शिक्षा विभाग के अंतर्गत AEDO पद के लिए पहली बार आयोजित की गई थी। कुल 935 पदों के लिए यह भर्ती निकाली गई थी, जिसमें लगभग 10 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा 14 से 21 अप्रैल के बीच नौ पालियों में आयोजित की गई थी, जबकि सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षा 23 अप्रैल को संपन्न हुई थी।

परीक्षा को तीन चरणों में विभाजित किया गया था—पहला चरण 14-15 अप्रैल, दूसरा चरण 17-18 अप्रैल और तीसरा चरण 20-21 अप्रैल को आयोजित हुआ था। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की भागीदारी के कारण यह भर्ती राज्य की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक मानी जा रही थी।

मुंगेर से खुला कांड का राज

सूत्रों के अनुसार, परीक्षा से ठीक एक दिन पहले मुंगेर जिले में गड़बड़ी की सूचना मिली थी, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होना शुरू हुआ। जांच में अब तक 36 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से 22 गिरफ्तारी केवल मुंगेर जिले से की गई हैं। यह संकेत देता है कि इस पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

EOU कर रही जांच, मास्टरमाइंड अब भी फरार

मामले की जांच अब आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit Bihar) को सौंपी गई है। EOU लगातार विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड का पता नहीं चल पाया है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी तक कोई ठोस सबूत ऐसा नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था या इंटरनेट पर वायरल किया गया था। हालांकि नकल और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी के प्रयास की पुष्टि जरूर हुई है।

आयोग का सख्त संदेश

BPSC ने साफ कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग का कहना है कि भविष्य की परीक्षाओं को और अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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